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बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: एनडीए में सीट बंटवारे पर सहमति लगभग तय, 9-10 सीटों पर राजनीतिक हलचल तेज

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बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर एनडीए में सीट बंटवारे पर मंथन अंतिम चरण में है। बीजेपी और जेडीयू को बराबर सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है।

पटना/बिहार/आलम की खबर:बिहार में विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष एनडीए के भीतर सीट बंटवारे को लेकर चल रहा मंथन अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। सूत्रों के अनुसार गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग का लगभग फॉर्मूला तय माना जा रहा है, जिसमें बीजेपी और जेडीयू को बराबर-बराबर हिस्सेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही सहयोगी दलों को भी प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर सहमति बनती दिखाई दे रही है।

जानकारी के अनुसार एनडीए के अंदर बीजेपी को तीन और जेडीयू को तीन सीटें दिए जाने पर लगभग सहमति बन चुकी है। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक-एक सीट दिए जाने की चर्चा है। बची हुई एक सीट को लेकर अंतिम निर्णय अभी लंबित है, जिस पर शीर्ष नेतृत्व के बीच विचार-विमर्श जारी है। जल्द ही सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार चयन के दौरान जातीय समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और संगठनात्मक मजबूती को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। एनडीए नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले ताकि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश मजबूत किया जा सके। इसी कारण कई नए और युवा चेहरों को भी मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है।

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार बिहार विधान परिषद की इन 9 सीटों का कार्यकाल 28 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग द्वारा जल्द ही अधिसूचना जारी किए जाने की संभावना है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मई के अंतिम सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है, जिसके बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो जाएंगी।

विधानसभा के मौजूदा समीकरण को देखा जाए तो 243 सदस्यीय सदन में एनडीए की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। परिषद चुनाव में एक सीट जीतने के लिए लगभग 25 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है, और वर्तमान संख्या बल के आधार पर एनडीए को स्पष्ट बढ़त प्राप्त है। इसी कारण माना जा रहा है कि एनडीए अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज कर सकता है।

इस चुनाव में एक अतिरिक्त सीट पर भी मतदान होगा, जो उपचुनाव के तहत भरी जाएगी। यह सीट उस समय रिक्त हुई थी जब पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद विधान परिषद से उनका इस्तीफा हुआ था। इस तरह कुल मिलाकर 10 सीटों पर चुनाव की स्थिति बन गई है।

वर्तमान स्थिति के अनुसार जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें जेडीयू के पास 5 सीटें, बीजेपी के पास 2 सीटें, आरजेडी के पास 2 सीटें और कांग्रेस के पास 1 सीट मौजूद है। चुनाव के बाद इस राजनीतिक समीकरण में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि यह विधान परिषद चुनाव सभी दलों के लिए आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति का परीक्षण साबित होगा। एनडीए जहां अपनी एकजुटता और संगठनात्मक ताकत दिखाने की कोशिश करेगा, वहीं महागठबंधन सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करेगा।

फिलहाल सभी दल संभावित उम्मीदवारों के नामों पर गहन मंथन में जुटे हुए हैं। वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ कई युवा चेहरों के नाम भी चर्चा में हैं। अब सभी की नजरें चुनाव आयोग की आधिकारिक अधिसूचना और एनडीए के सीट बंटवारे की अंतिम घोषणा पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में बिहार की राजनीतिक दिशा तय करेगी।

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